अर्जुन ने क्यों छीनी अश्वथामा की मणि

अर्जुन ने क्यों छीनी अश्वथामा की मणि

 द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा के पास एक चमत्कारिक मणि थी जिसके बल पर वह शक्तिशाली और अमर हो गया था। अश्वत्थामा द्रोणाचार्य के पुत्र थे। द्रोणाचार्य ने शिव को अपनी तपस्या से प्रसन्न करके उन्हीं के अंश से अश्वत्थामा नामक पुत्र को प्राप्त किया। अश्‍वत्थामा के पास शिवजी द्वारा दी गई कई शक्तियां थीं। वे स्वयं शिव का अंश थे।

 

जन्म से ही अश्वत्थामा के मस्तक में एक अमूल्य मणि विद्यमान थी, जो कि उसे दैत्य, दानव, शस्त्र, व्याधि, देवता, नाग आदि से निर्भय रखती थी। इस मणि के कारण ही उस पर किसी भी अस्त्र-शस्त्र का असर नहीं हो पाता था।



अपने पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु के बाद गुस्से से पागल होकर अश्वत्थामा ने पांडवों के पाँचों पुत्रों के सिर अश्वत्थामा ने काट डाले |अश्वत्थामा के इस कुकर्म की सभी ने निंदा की यहाँ तक कि दुर्योधन तक को भी यह अच्छा नहीं लगा | पुत्रों की इस दशा को देखकर और द्रौपदी के विलाप को सुनकर अर्जुन ने प्रतिज्ञा की कि अश्वत्थामा का वध कर देंगे |


 भगवान कृष्ण के साथ अर्जुन ने उसका पीछा किया तो उसने अर्जुन पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया | कृष्ण जानते थे कि ब्रह्मास्त्र के टकराने से धरती पर विनाश होगा इसलिए उन्होंने अर्जुन से इसे रोकने और फिर शांत करने को कहा | इसके बाद अर्जुन ने अश्वत्थामा को पकड़ कर बाँध लिया | 


उसे लेकर द्रौपदी के पास आये तो द्रौपदी ने जानवरों के जैसे बंधे गुरुपुत्र को देखकर और उसकी माता कृपी के लिए अर्जुन से कहा कि इसे छोड़ दिया जाए | सभी ने द्रौपदी की प्रशंसा की किन्तु भीम का क्रोध शांत नहीं हुआ |


अर्जुन ने क्यों छीनी अश्वथामा की मणि



तब श्रीकृष्ण ने कहा कि आततायी को दण्ड न देना भी पाप है| उनकी बात को समझ कर अर्जुन ने अपनी तलवार से अश्वत्थामा के सिर के केश काट डाले और उसके मस्तक की मणि निकाल ली | मणि निकल जाने से वह श्रीहीन हो गया | 


अर्जुन ने उसे उसी अपमानित अवस्था में शिविर से बाहर निकाल दिया | अर्जुन ने यह मणि द्रौपदी को दे दी और द्रौपदी ने उसे युधिष्ठिर के अधिकार में दे दी |अश्वत्थामा को महाभारत का सबसे घृणित पात्र माना जाता है |

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