चाणक्य के अनुसार कौन बन सकता है धनी।

चाणक्य के अनुसार कौन बन सकता है धनी।

 आज हम जानेंगे चाणक्य के अनुसार कौन बन सकता है धनी। 

चाणक्य के अनुसार कौन बन सकता है धनी। 

चाणक्य नीति की बातें व्यक्ति को जीवन में कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित करती हैं। चाणक्य की गिनती भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है, चाणक्य को अर्थशास्त्र के साथ साथ कई अन्य विषयों की भी गहरी जानकारी थी। आचार्य चाणक्य को राजनीति शास्त्र और कूटनीति शास्त्र के साथ समाजशास्त्र की भी गहरी जानकारी थी। चाणक्य नीति की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं। 


1) चाणक्य के अनुसार मृत्यु के कारण 


चाणक्य कहते हैं कि जिस घर में दुष्ट स्त्रियां होती है, वहां गृहस्वामी की स्थिति मृतक के समान होती है। इसी प्रकार धूर्त स्वाभव वाला मित्र भी विश्वास के योग्य नहीं होता, जो नौकर पलट कर अपने मालिक के सामने जवाब देता है। वह कभी भी हानि पहुंचा सकता है। इस प्रकार जहां सांप को का वास होता है, वहां रहना भी घातक हो सकता है।

2) चाणक्य के अनुसार धन का महत्व


 चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य को विपत्ति के समय के लिए धन का संग्रह जरूर करना चाहिए। लक्ष्मी का स्वभाव चंचल होता है। किसी भी समय वह मनुष्य को छोड़ कर जा सकती है। ऐसी स्थिति में उसे अपने पुरुषार्थ पर भरोसा करना चाहिए।

3) चाणक्य के अनुसार विनाश के कारण


 चाणक्य कहते हैं। नदी के किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है क्योंकि नदियां बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उखाड़ देती हैं। इसी प्रकार दूसरों के घर में रहने वाली स्त्री भी किसी भी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है। इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देने वाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकते।

4) परिश्रम


चाणक्य कहते हैं जो व्यक्ति निरंतर परिश्रम करते हैं, उनकी गरीबी स्वयं दूर हो जाती है। परिश्रम करके सभी प्रकार की सुख संपत्ति को अर्जित किया जा सकता है। जो व्यक्ति हमेशा प्रभु का नाम जपता रहता है। वह पाप कार्य में प्रवृत्त नहीं हो पाता। मौन रहने यानी सहनशील रहने से लड़ाई झगड़ा नहीं होता। जो व्यक्ति सतर्क रहकर अपने काम करता है। उसे किसी प्रकार का भय नहीं रहता क्योंकि सतर्क रहने से व्यक्ति चीजों के खतरे को पहले से ही संभाल सकता है।

5) वाणी की मधुरता 


चाणक्य कहते हैं जिस व्यक्ति में सामर्थ्य होती है, वह प्रत्येक काम को सफलतापूर्वक कर लेता है। व्यवसाई अपने व्यापार की वृद्धि के लिए दूर देशों में जा सकते हैं। उनके लिए कोई भी स्थान दूर नहीं होता। विद्वान व्यक्ति जहां भी जाता है उसकी विद्वता के कारण वहां भी उसका समान होता है। इस प्रकार मधुर वचन बोलने वाला व्यक्ति पराए लोगों को भी सरलता से अपना बना लेता है।

6) माता पिता का कर्तव्य


 चाणक्य कहते हैं कि 5 वर्ष की आयु तक के पुत्र के साथ लाड प्यार किया जा सकता है। इसके बाद 10 वर्ष की आयु तक उचित दंड दिया जा सकता है। परंतु 16 वर्ष की आयु तक पहुंचने पर उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए।

चाणक्य के अनुसार कौन बन सकता है धनी।



7) विद्या


 चाणक्य विद्या को गुप्त धन बताते हुए कहते हैं कि यह कामधेनु के समान है अर्थात इससे मनुष्य की सारी इच्छाएं पूर्ण होती है। विद्या के कारण विदेश में भी व्यक्ति का सम्मान होता है। यह सुरक्षित धन है जिसे सोने के समान ना कोई छीन सकता है ना कोई चुरा सकता है।


8) कर्म का प्रभाव 


चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति जैसे कर्म करता है, उसके अनुसार ही उसे कर्मों का फल भोगना पड़ता है। उसी के अनुरूप ही उसे दुख और सुख मिलता है। बार-बार जन्म मृत्यु के चक्कर में वह संसार में भटकता रहता है और जब उसे ज्ञान प्राप्त हो जाता है तो स्वयं इस चक्कर से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है।

9) अर्जित धन का सदुपयोग


 चाणक्य कहते हैं कि धन कमाने के बाद उसे अच्छे कामों में खर्च करना चाहिए। यही धन की रक्षा है जैसे तालाबों में भरे हुए पानी को यदि निकाला ना जाएगा तो वह सड़ जाता है।

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आज आपने जाना चाणक्य के अनुसार कौन बन सकता है धनी। 
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