भगवान राम के सिवा श्री कृष्ण भी तोड़ चुके है शिव धनुष

भगवान राम के सिवा श्री कृष्ण भी तोड़ चुके है शिव धनुष

जैसा कि हम सभी जानते है भगवान शिव के धनुष का नाम पिनाक है आईए जानते है पिनाक धनुष के बारे में। 

 पिनाक : यह सबसे शक्तिशाली धनुष था। संपूर्ण धर्म, योग और विद्याओं की शुरुआत भगवान शंकर से होती है और उसका अंत भी उन्हीं पर होता है। भगवान शंकर ने इस धनुष से त्रिपुरासुर को मारा था। 

 शिव ने जिस धनुष को बनाया था उसकी टंकार से ही बादल फट जाते थे और पर्वत हिलने लगते थे। ऐसा लगता था मानो भूकंप आ गया हो। यह धनुष बहुत ही शक्तिशाली था। इसी के एक तीर से त्रिपुरासुर की तीनों नगरियों को ध्वस्त कर दिया गया था। देवी और देवताओं के काल की समाप्ति के बाद इस धनुष को देवराज इन्द्र को सौंप दिया गया था।

भगवान राम के सिवा श्री कृष्ण भी तोड़ चुके है शिव धनुष


उल्लेखनीय है कि राजा दक्ष के यज्ञ में यज्ञ का भाग शिव को नहीं देने के कारण भगवान शंकर बहुत क्रोधित हो गए थे और उन्होंने सभी देवताओं को अपने पिनाक धनुष से नष्ट करने की ठानी। एक टंकार से धरती का वातावरण भयानक हो गया। बड़ी मुश्किल से उनका क्रोध शांत किया गया, तब उन्होंने यह धनुष देवताओं को दे दिया।

 

 देवताओं ने राजा जनक के पूर्वज देवराज इन्द्र को दे दिया। राजा जनक के पूर्वजों में निमि के ज्येष्ठ पुत्र देवराज थे। शिव-धनुष उन्हीं की धरोहरस्वरूप राजा जनक के पास सुरक्षित था। इस धनुष को भगवान शंकर ने स्वयं अपने हाथों से बनाया था। उनके इस विशालकाय धनुष को कोई भी उठाने की क्षमता नहीं रखता था, लेकिन भगवान राम ने इसे उठाकर इसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और इसे एक झटके में तोड़ दिया। 

 राम के अलावा श्रीकृष्ण भी तोड़ चुके हैं शिव धनुष


 श्रीकृष्ण भी तोड़ चुके हैं शिव धनुष (पिनाक)


 शिव धनुष श्रीराम ने सीता स्वयंवर के समय तोड़ा था। जिस धनुष को कोई बलशाली राजा हिला नहीं पाए थें, उसे राम जी ने बड़ी ही आसानी से तोड़ दिया था। इसके बाद राम और सीता जी का विवाह सम्पन्न हुआ था। लेकिन इसके बाद शिव धनुष टूटने से परशुराम जी काफी क्रोधित हुए थे। इस प्रसंग के बारे में तो काफी लोगों को पता है। 

लेकिन यह बहुत कम लोग जानते हैं कि भगवान श्री कृष्ण भी शिव धनुष तोड़ चुके हैं। श्री कृष्ण द्वारा शिव धनुष तोड़ने का प्रसंग भी बड़ा ही रोचक है। आइए विस्तार से बताते हैं आपको श्री कृष्ण ने शिव धनुष को क्यों तोड़ा।

जब भगवान विष्णु ने अपना आठवां अवतार श्रीकृष्ण के रुप में लिया तब कुछ परस्थितियों के कारण श्रीकृष्ण के हाथों शिवजी का धनुष टूट गया। यह घटना उस समय हुई जब कंस ने अक्रूरजी द्वारा श्रीकृष्ण को नंदगांव में मथुरा बुलाकर उनकी हत्या की योजना बनाई थी।

कंस के बुलावे पर श्रीकृष्ण अक्रूरजी के साथ धनुष यज्ञ में शामिल होने के लिए मथुरा आए। कंस से मिलने के पहले श्रीकृष्ण नगर भ्रमण करने चल पड़े। नगर भ्रमण करते हुए श्रीकृष्ण उस मंदिर पहुंच गए जहां यज्ञ का आयोजन किया था। 

उस ही मंदिर में कंस ने भगवान शिव का धनुष रखा था और इसी धनुष के लिए यज्ञ का आयोजन भी किया था


 श्रीकृष्ण ने बालक की तरह उत्सुक होकर इस धनुष को छूने की इच्छा जताई फिर मंदिर के पुजारी और धनुष के रक्षक सैनिकों से कहा कि वह इस धनुष को उठाकर देखना चाहते हैं। कृष्ण की इच्छा सुन कर पहले सभी हंसने लगे कि भला एक बालक इस धनुष को कैसे उठा सकता है, लेकिन श्रीकृष्ण ने खेल-खेल में ही धनुष को उठाकर तोड़ दिया।

भगवान राम के सिवा श्री कृष्ण भी तोड़ चुके है शिव धनुष



 कंस ने जब धनुष के टूटने का समाचार सुना तो वह घबरा गया क्योंकि ऐसी भविष्यवाणी थी की जो इस धनुष को उठा लेगा उसके हाथों कंस का वध होगा। मथुरा की जनता में खुशी का माहौल बन गया की कंस को मारने वाला आ गया। इस घटना के अगले ही दिन श्रीकृष्ण ने कंस का वध कर दिया और मथुरा को कंस के अत्याचार से मुक्त करवाया।

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