महाभारत में कौन कौन किसका अवतार था?

महाभारत में कौन कौन किसका अवतार था?

 आज हम जानेंगे महाभारत में कौन कौन किसका अवतार था? 

भारत का प्राचीन इतिहास ग्रंथ 'महाभारत' कई रहस्यों से भरा हुआ है। इसका प्रत्येक पात्र अपने आप में एक रहस्य है।महाभारत में जितने भी प्रमुख पात्र थे वे सभी देवता, गंधर्व, यक्ष, रुद्र, वसु, अप्सरा, राक्षस तथा ऋषियों के अंशावतार थे। उनमें से शायद ही कोई सामान्य मनुष्य रहा हो। महाभारत के आदिपर्व में इसका विस्तृत वर्णन किया गया है। आईए जानते हैं कि कौन किसका अवतार था?


भगवान कृष्ण

सबसे पहले बात भगवान कृष्ण की, भगवान कृष्ण को 64 कलाओं और अष्ट सिद्धियों से परिपूर्ण माना जाता है। वो विष्णु रूप में पूर्ण अवतार ले कर अवतरित हुए थे।


बलराम

बलराम के विषय में माना गया है कि वे विष्णु के आसन बने शेषनाग के अंश के रूप में जन्मे थे। जब कंस ने देवकी के 6 पुत्रों की हत्या की, उसी दौरान देवकी के गर्भ में बलराम पधारे। कृष्ण के बड़े भाई होने की वजह से उन्हें दाउजी के नाम से भी जाना जाता है। 


भीष्म

श्रीकृष्ण के बाद अगर महाभारत का कोई सबसे प्रमुख और चर्चित पात्र रहा तो वो हैं “भीष्म” पितामाह। पांच वसुओं में से एक ‘द्यु’ नामक वसु देवव्रत ने भीष्म के रूप में जन्म लिया था।


द्रोणाचार्य

कौरवों और पांडवों के गुरु रहे द्रोणाचार्य अत्यंत शक्तिशाली और पराक्रमी योद्धा थे। माना जाता है देवताओं के गुरु बृहस्पति देव ने ही द्रोणाचार्य के रूप में जन्म लिया था।


अश्वत्थामा

अश्वत्थामा, गुरु द्रोण के पुत्र थे। जिन्होंने महाकाल, यम, क्रोध, काल के अंशों के रूप में जन्म लिया था। महाभारत के युद्ध में पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने बहुत कोहराम मचाया था।


कर्ण

कुंती ने विवाह पूर्व कर्ण को जन्म दिया था। उन्हें सूर्यपुत्र कर्ण भी कहा जाता है, क्योंकि कर्ण का जन्म सूर्यदेव के आशीर्वाद से हुआ था। माना जाता है अपने पूर्व जन्म में कर्ण एक असुर थे, जिस कारण एक राजवंशी होने के बाद भी उन्हें सिंहासन का सुख प्राप्त नहीं हुआ।








दुर्योधन

धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र दुर्योधन का वास्तविक नाम सुयोधन था, लेकिन अपने कृत्य की वजह से उन्हें दुर्योधन नाम से पहचान बनाई। माना जाता है दुर्योधन और उसके भाई पुलस्त्य वंश के राक्षसों के अंश थे।


अर्जुन

अर्जुन को पांडु पुत्र माना जाता है, लेकिन असल में वे इन्द्र और कुंती के पुत्र थे। दानवीर कर्ण को इन्द्र का अंश ही माना जाता है

द्रौपदी

महाभारत की सबसे जरूरी और शायद सबसे शक्तिशाली स्त्री पात्र रहीं द्रौपदी का जन्म इन्द्राणी के अवतार के रूप में हुआ था।


रुक्मिणी

राजा भीष्मक की पुत्री और भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को माता लक्ष्मी का ही अवतार माना जाता है।


अन्य :

* अभिमन्यु चंद्रमा के पुत्र वर्चा का अंश था। मरुतगण के अंश से सात्यकि, द्रुपद, कृतवर्मा व विराट का जन्म हुआ था। अग्नि के अंश से धृष्टधुम्न व राक्षस के अंश से शिखंडी का जन्म हुआ था।


* विश्वदेवगण द्रौपदी के पांचों पुत्र प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ति, शतानीक और श्रुतसेव के रूप में पैदा हुए थे।


* दानवराज विप्रचित्ति जरासंध व हिरण्यकशिपु शिशुपाल का अंश था।


* कालनेमि दैत्य ने ही कंस का रूप धारण किया था।


* इंद्र की आज्ञानुसार अप्सराओं के अंश से 16 हजार स्त्रियां उत्पन्न हुई थीं।

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