Nidhivan Story In Hindi

Nidhivan Story In Hindi

Nidhivan Story In Hindi


भगवान श्री कृष्ण की लीलाएँ आज भी कोई याद करे तो भी बस उन्हीं में खो जाता है। आज हम जानेंगे Nidhivan Story In Hindi के बारे में। 


भगवान श्री कृष्ण की तो बात ही निराली है मथुरा, वृंदावन् और गोकुल यह जगह आज भी वहाँ भगवान श्री कृष्ण की मौजूदगी का सबूत देती है। वृंदावन् में ही एक ऐसी जगह है जिसे Nidhvan के नाम से जाना जाता है। Nidhivan Story In Hindi में बात होगी कुछ रहस्यों की जो आज भी Nidhvan में छूपे हुए है। 



Nidhivan Story In Hindi के अनुसार Nidhivan में आज भी मध्य रात्रि को भगवान श्री कृष्ण गोपियों  के साथ रास करने आते है। Nidhivan का यह रहस्य जानने की जिसने भी कोशिश की वह या तो मृत्यु को प्राप्त हुआ या पागल या फिर अंधा हो गया। 


Nidhivan में आज भी आते है श्री कृष्ण


Nidhivan Story In Hindi में हम जान रहे है भगवान श्री कृष्ण के बारे में आप में से बहुत से लोग Nidhivan गए होंगे। Nidhivan में आज भी भगवान श्री कृष्ण आते है। कहा जाता है Nidhivan में पूरा दिन बंदर रहते है। लेकिन शाम के समय बन्दर भी वहाँ से चले जाते है। 


शाम के वक्त यहाँ सनाट्टा छा जाता है। यहाँ एक पक्षी तक भी दिखाई नही देता है। Nidhivan Story In Hindi के अनुसार यहाँ 16,108 वृक्ष है जो कि रात को गोपियों का रूप ले लेते हैं और भगवान के साथ रास रचाते है। 


कुछ लोगोँ ने यहाँ कई बार वृक्षों को रस्सियों से बांधने की भी कोशिश की परंतु रस्सिया अगले दिन ही खुली मिलती है। Nidhivan Story In Hindi यहाँ जो भी जाता हैं वो अगले दिन से ही अपनी सुध बुद्ध खो बैठता है और अपने प्राण त्याग देता है। भगवान की सुंदरता ही ऐसी ही कि कोई उन्हे एक बार देख ले तो दुनिया की मोह माया से दूर हो जाता है। 


Nidhivan में ऐसे कई रहस्य है जो कि आज आप Nidhivan Story In Hindi में जान रहे है। 


Nidhivan Story In Hindi


कहते है एक बार भगवान श्री कृष्ण का भक्त कोलकाता से आया था। उसे विश्वास नही हो रहा था कि Nidhivan में आज भी भगवान श्री कृष्ण आते है। वह वृंदावन् आ गया भगवान के दर्शन किये और Nidhivan में आकर छुप गया। पहले दिन उसे वहाँ से निकाल दिया गया, दूसरे दिन भी ऐसा ही हुआ परंतु फिर वह Nidhivan के एक ऐसे कोने में छिप गया जहाँ उसे कोई नही देख सके। 



वो वहाँ छुप गया और पूरी रात वहीं बिता दी अगले दिन कुछ लोगों ने उसे देखा उसके मुह से झाग निकल रही थी। वह किसी से बात भी नही कर रहा था। उसके गुरु जी को बुलाया गया जो कि गोवर्धन पर्वत के पास रहते थे वो उसे अपने आश्रम ले गए वह भूखा प्यासा कुछ दिन वहीं पड़ा रहा। 


एक दिन उसने अपने गुरु से कागज और कलम मांगा गुरु जी ने उसे कागज और कलम दिया और चले गए। उसने लिख गुरु जी Nidhivan में मैने भगवान बांके बिहारी जी को राधा जी और अन्य गोपियों के साथ रास रचाते हुए देखा उनकी सुंदरता के आगे यह दुनिया कुछ भी नही है। 


मेरी जिंदगी का लक्ष्य पूरा हो चुका है जब गुरु वापिस आए तो देखा कि उनके शिष्य ने दीवार के सहारे अपने प्राण त्याग दिये हैं। यह एक दम असली कहानी है ये पत्र आज भी वृंदावन् के सरकारी दफ्तर में मौजूद है। ऐसे ही बहुत से किस्से और भी है। (आप पड़ रहे है Nidhivan Story In Hindi) 


Nidhivan Story In Hindi


यहाँ एक रंगमहल है कहते है रास करने के बाद भगवान वहाँ आराम करते हैं। यहाँ पुजारी रात को लड्डू, पानी और दातून रखते है अगले दिन लड्डू खाए हुए मिलते है पानी पिया हुआ होता है और दातून चबाई हुई होती है। पुजारी रात को द्वार पर सात ताले लगाते है लेकिन फिर भी सब कुछ वैसा ही मिलता है। 

(आप पढ़ रहे थे Nidhivan Story In Hindi) 


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