Baba Balak Nath Story In Hindi

Baba Balak Nath Story In Hindi

Baba Balak Nath Story In Hindi


आज हम जानेंगे Baba Balak Nath Story In Hindi के बारे में। Baba Balak Nath का नाम सुनते ही शाहतालाई ( जो कि बिलासपुर हिमाचल प्रदेश में स्थित है) की याद आ ही जाती है। Baba Balak Nath जी को पौनाहारी भी कहा जाता है। 



देश विदेश से लाखों की संख्या में लोग Baba Balak Nath जी के दर्शन करने के लिए आते है। (आप पढ़ रहे है Baba Balak Nath Story In Hindi) 


ऊँची चोटी में है मंदिर


Baba Balak Nath Story In Hindi/ Baba Balak Nath जी का मंदिर एक ऊँची पहाड़ी में बसा है। पहाड़ी के बीच एक चमत्कारी गुफा है, कहते है यही Baba Balak Nath जी का निवास स्थान है। Baba Balak Nath जी की गुफा में महिलाओं का जाना वर्जित है, महिलाओं को दर्शन के लिए एक चबूतरा बनाया गया है। 


Baba Balak Nath जी को प्रसाद के रूप में रोट चढ़ाया जाता है। Baba Balak Nath जी को बकरा भी चढ़ाया जाता है पर उसकी कभी बलि नही चढ़ाई नहीं जाती उनका पालन पोषण किया जाता है। इसे बाबा जी के प्रेम का प्रतीक माना जाता है। 


Baba Balak Nath Story In Hindi


Baba Balak Nath जी का मंदिर हमीरपुर से 45 किलोमीटर दूरी पर है। Baba Balak Nath जी हर युग में जन्म लेते है। Baba Balak Nath जी को भगवान शिव का अंश अवतार भी माना जाता है। 


3 वर्ष की आयु में छोड़ा घर- परिवार


Baba Balak Nath जी ने 3 वर्ष की आयु में अपना घर परिवार छोड़ दिया था। Baba Balak Nath जी गुजरात के जूनागढ़ से शाहतालाई आए थे। 


हर युग में जन्मे  Baba Balak Nath


Baba Balak Nath जी हर युग में इस धरती पर आए। सतयुग में संकद, त्रेतायुग में कौल, द्वापर में महाकौल और कलयुग में Baba Balak Nath जी का जन्म गुजरात में हुआ। उनके पिता का नाम विष्णु और माता का नाम लक्ष्मी है। Baba Balak Nath Story In Hindi में आप जान रहे हैं Baba Balak Nath जी के बारे में। 


गुरु दत्तात्रेय से शिक्षा ग्रहण की। 

Baba Balak Nath जी ने गुरु दत्तात्रेय से अपनी शिक्षा ग्रहण की थी और उन्हे ही अपना गुरु माना। 


माँ रत्नो से मुलाकात


Baba Balak Nath Story In Hindi के अनुसार Baba Balak Nath जब बिलासपुर के शाहतालाई पहुँचे तो उनकी मुलाकात माँ रत्नो से हुई। Baba Balak Nath जी ने माँ रत्नो को ही अपनी माँ माँ मान लिया। वो वहीं रहकर उनकी गाय चराते और वृक्ष के नीचे ध्यान में मगन् रहते। 


माँ रत्नो रोज Baba Balak Nath जी को रोटी और लस्सी देती थी। Baba Balak Nath Story In Hindi के माध्यम से आपको जानने को मिलेगी Baba Balak Nath जी की पूरी कहानी। 


गोरखनाथ और Baba Balak Nath


Baba Balak Nath Story In Hindi से पता चलता है कि Baba Balak Nath जी को गोरखनाथ जी अपना शिष्य बनाना चाहते थे। Baba Balak Nath जी ने कई बार गोरखनाथ जी का प्रस्ताव ठुकरा दिया। 


एक बार गोरखनाथ जी ने फिर से कोशिश की वो कुछ दिन बाद फिर Baba Balak Nath जी से मिले। उन्होंने पहले तो Baba Balak Nath जी को अपने शिष्यों का पेट भरने का आदेश दिया। Baba Balak Nath जी ने सबको गायों का दूध पिलाया। 


यह सब देख कर गोरखनाथ नहुत प्रभावित हुए और एक बार फिर Baba Balak Nath जी को अपना शिष्य बनने को कहा। Baba Balak Nath जी के मना करने पर गोरखनाथ जी क्रोधित हो गए। उन्होंने अपने शिष्यों से कहा कि वो Baba Balak Nath जी के कानों में छेद कर दे। 


शिष्यों के ऐसा करने पर Baba Balak Nath जी के कानो से खून की जगह दूध निकलने लगा। Baba Balak Nath Story In Hindi से पता लगता है कि Baba Balak Nath जी ने जब  शिष्य बनने से इन्कार किया तो गोरखनाथ जी ने Baba Balak Nath जी को अपनी मृगशाला आसमान से नीचे लाने को कहा Baba जी ने अपने चमत्कारी चिमटे से मृगशाला नीचे लाई और मोर पर सवार होकर उड़ गए। 


12 साल की माँ रत्नो की सेवा


Baba Balak Nath जी ने 12 साल माँ रत्नो की सेवा की। जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके है वह माँ रत्नो की गाय चराते थे। Baba Balak Nath गाय चराने के लिए छोड़ देते और खुद ध्यान में लगे रहते। 


एक बार गाय फसल खाने के लिए खेतों में चली गयी फिर लोग Baba Balak Nath को ताने मारने लगे और माँ रत्नो के पास उल्लाहना ले कर चले गए। Baba Balak Nath की इस बात से माँ रत्नो नाराज हो गई। यह सब Baba Balak Nath जी की लीला के कारण हो रहा था। 


क्योंकि अब 12 वर्ष पूरे हो चुके थे। माँ रत्नो उन्हे ताने मारने लगी कि मैने तुम्हे 12 वर्ष रोटी और लस्सी खिलाई। Baba Balak Nath जी ने कहा कि आप फसल देख लीजिये एक दम सुरक्षित है। Baba Balak Nath को कुछ लोग कहने लगे कि हमने अपनी आँखों से देखा हैं कि फसल गाय खा चुकी है। 


परंतु जब फसल देखी गयी तो फसल एकदम ठीक थी। लोग जय Babe दी नारे लगाने लगे उसके बाद माँ रत्नो Baba Balak Nath जी से माफी माँगने लगी। Baba Balak Nath जी ने उन्हे माफ तो कर दिया और साथ ही ये भी बताया कि उन्होंने कभी रोटी और लस्सी खाई ही नही। 


मैं दुधाधारी हूँ केवल दूध का सेवन करता हूँ। Baba Balak Nath जी ने पेड़ मे चिमटा मारा और, 12 वर्ष की सारी रोटियां और लस्सी बाहर निकल आई। Baba Balak Nath जी ने वो स्थान छोड़ दिया। यह वृक्ष आज भी मौजूद है। 


Baba Balak Nath जी ने वादा किया कि वह हर चैत्र माह पर शाहतलाई आएंगे। फिर वो उस स्थान से चले गए आज भी चैत्र माह पर Baba Balak Nath यहाँ आते है। यहाँ मेलों का आयोजन होता है। 


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