How did Rama died- भगवान राम की मृत्यु

How did Rama died- भगवान राम की मृत्यु


 हमारे भगवान राम विष्णु जी के सातवें अवतार है उन्होंने मनुष्य का रूप लिया और हमें बहुत सी शिक्षांए दी भगवान राम को हम सब जब भी देखते हैं तो वह सदा हमें हंसते हुए ही दिखाई देते हैं जैसा कि हम सब जानते हैं की भगवान राम का जीवन मुश्किलों से भरा हुआ था 

बस केवल एक मुस्कान थी जो कभी उनके चेहरे से नहीं गयी कैसी भी मुश्किल क्यों ना हो सदा शांत स्वभाव से हर मुश्किल का सामना करते भगवान राम के तीन और भाई भी थे भगवान राम सबसे बड़े थे उनके पिता का नाम दशरथ और माता का नाम कौशल्या था भगवान राम जी की पत्नी का नाम सीता था जो की माता लक्ष्मी का रूप थी भगवान राम एक महान राजा थे


 हम सब को पता है कि भगवान राम जी को 14 वर्ष का वनवास हुआ था बनवास के दौरा रावण सीता का हरन कर ले गया था तब भगवान राम ने रावण का वध किया था यह सब लीला भगवान राम की ही थी फिर भी वापिस आकार अयोध्या में राज करने लगे पर राम पृथ्वी लोक से वापिस वैकुंठ कैसे गए आज हम इसी कहानी के बारे में जानेंगे।


भगवान राम की मृत्यु कैसे हुई



भगवान श्री राम की मृत्यु को लेकर बहुत सी कहानियां हैं भगवान राम जी ने जब पृथ्वी लोक छोड़ा तो यह भी उनकी लीला थी कथा के अनुसार जब माता सीता धरती माता की भगवान में समाने जा रही थी अपने दों पुत्र लव और कुश को भगवान राम को सौंप दिया और खुद धरती में समा गई माता सीता के चले जाने के बाद भगवान राम ने भी सरयू नदी के किनारे पर जल समाधि ले ली थी।


उसके बाद वो पृथ्वी लोक को छोडकर बैकुंठ में वापस चले गए थे कहा जाता है की जब भगवान राम ने जल समाधि ली तब उनके साथ उनके आसपास में रहने वाले सभी लोगों ने भी जल समाधि ली और मुक्ति प्राप्त की राम भगवान सह शरीर वैकुंठ वापिस गए थे इसलिए उनकी कभी मृत्यु नहीं हुई, बस समाधि लेकर पृथ्वी लोक छोड गए। 

हनुमान जी प्रभु राम को छोड़ना नही चाहते थे

कहते हैं की जब प्रभु श्री राम जी की लीला संपन्न हो गई तब यमराज जी उन्हें वापस ले जाने आए परंतु हर बार यमराज जी को हनुमान का सामना करना पड़ता एक दिन प्रभु श्री राम ने अपनी एक अंगुठी पाताल लोक में फेंक दी और हनुमान जी अंगुठी को लेने पाताल लोक पहुँच गए । 

जब यमराज को यह बात पता चली तो एक संत का रूप बनाया और अयोध्या पहुँच गए वह भगवान राम के कक्ष में गए और उनसे कहा यदि हम दोंनों की बातचीत जो कोई भी भंग करेगा आप उसको मृत्युदंड देंगे भगवान राम ने कहा ठीक है भगवान राम ने द्वार पर लक्ष्मण जी को पहरा देने को कहा और फिर प्रभु श्री राम यमराज जी के साथ बातचीत करने लगे उसी बीच ऋषि दूर्वासा आ पहुंचे। 



  
और लक्ष्मण जी से अंदर जाने का अनुरोध करने लगे लक्ष्मण जी ने उन्हें मना किया तो वो क्रोध भड़क उठे उनका क्रोध इतना भयंकर था कि पूरी अयोध्या एक बार मे मिट्टी में मिल जाए ऐसे में लक्ष्मण को मजबूर होकर अंदर जाना पड़ा और प्रभु श्री राम जी को मजबूरी में लक्ष्मण को बहार निकलना पड़ा लक्ष्मण ने सरयू नदी में समाधि ले ली बाद में भगवान राम ने भी सह शरीर सरयू नदी के माध्यम से वैकुंठ लौटने का फैसला किया । 



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