Mirabai Ka Jivan Parichay | In Hindi

Mirabai Ka Jivan Parichay | In Hindi

Description


Mirabai Ka Jivan Parichay | in hindi Mirabai Ka जन्म राजस्थान में हुआ था। Mirabai Ka Jivan Parichay हमें बहुत सी चीजों के बारे में ज्ञान देता है।


Mirabai ka jivan parichay | in hindi


Mirabai Ka Jivan Parichay हमें बहुत सी चीजों के बारे में बताता है। वह कृष्ण जी की बहुत बड़ी भक्त थी। आज हम आपको मीराबाई के बारे में बताएंगे। Mirabai Ka Jivan संघर्षों से भरा हुआ रहा पर वह सदा कृष्ण भक्ति में खोई रही।


Mirabai ka जन्म


Mirabai Ka जन्म राजस्थान में स्थित मेड़ता के पास चौकड़ी गांव में संत 1498 ईस्वी में हुआ था। Mirabai अपने दादाजी के साथ रहती थी। उनके दादाजी का नाम राव दूदा था। 


Mirabai Ka Jivan Parichay
Mirabai Ka Jivan Parichay


Mirabai की माता का निधन हो गया था। Mirabai जी के दादा जी बहुत धार्मिक इंसान थे।


अपने शुरुआती शिक्षा Mirabai ने अपने दादा जी के यहां रहकर ही की थी। Mirabai Ka Jivan बचपन से ही कठिनाइयों से भरा पड़ा था। इसलिए Mirabai Ka Jivan Parichay हमें बहुत कुछ सिखाता है।


बचपन से कृष्ण भक्त थी Mirabai । Mirabai Ka Jivan Parichay। In Hindi।


Mirabai Ka Jivan Parichay हमें सिखाता है कि आप कैसी भी परिस्थिति में क्यों ना हो। हमें सदा भगवान का नाम लेते रहना चाहिए। Mirabai बचपन से ही कृष्ण भक्ति और हर वक्त हरी नाम का नाम जपती थी।


 Meerabai जब अपनी मां के गर्भ में थी तब Mirabai जी के दादा ने भागवत का आयोजन किया था। तब Mirabai ने गर्भ में रहकर 7 दिन तक भागवत कथा सुनी थी जैसा कि हम बता चुके हैं कि Mirabai के दादाजी बहुत ही धार्मिक इंसान थे। हमेशा कथा सुनने जाते थे। 


एक बार वे Mirabai जी को भी अपने साथ लेकर गए। उस समय Mirabai जी की उम्र 5 वर्ष थी। Mirabai जी भगवान की इतनी बड़ी भक्त थी कि वे कथा सुनते सुनते रोने लगी। जैसे ही कथा खत्म हुई, वहां बैठे पंडित ने पूछा, किसी को कुछ पूछना है तो मैं यही हूं ।


आप अपना प्रश्न पूछ सकते हैं। किसी ने कुछ नहीं पूछा और अपने अपने घरों को जाने लगे। पंडित जी भी जाने लगे। तभी Mirabai उनके पीछे-पीछे जाने लगी। जब पंडित जी ने पीछे मुड़कर देखा तो पीछे एक 5 साल की छोटी बच्ची थी जो कि मीराबाई थी।


 Mirabai कहती है मैं आपसे कुछ पूछना चाहती हूं। पंडित ने सोचा यह एक छोटी सी बालिका है। यह क्या पूछेगी, परंतु Mirabai ने पूछा कि मुझे श्री कृष्ण कब मिलेंगे। मैं श्री कृष्ण के बिना नहीं रह सकती। Mirabai यह सब रोते-रोते कह रही थी।


 यह सुनकर पंडित भी रोने लगा कि मैं इतने वर्षों से कथा करता हूं। मैंने यह क्यों नहीं सोचा कि भगवान कब मिलेंगे तो कुछ ऐसा है Mirabai Ka Jivan parichay। Mirabai को बहुत ही बार जहर देने की कोशिश की गई। भगवान का प्रसाद समझकर Mirabai उसे पी लेती थी।


Mirabai का विवाह


Mirabai का विवाह 13 वर्ष की उम्र में हुआ था। उनका विवाह संघ 1516 ईस्वी में उदयपुर के राजा महाराणा सांगा के युवराज से संपन्न हुआ था। Mirabai के पति का नाम भोजराज था। विवाह के कुछ वर्षों बाद उनके पति का निधन हो गया।


 इस प्रकार बहुत छोटी उम्र में ही विधवा हो गई थी। कहते हैं कि उस समय पति की मृत्यु होने पर पत्नी को भी पति के साथ सती होना पड़ता था। Mirabai को भी क्षति करने का प्रयास किया गया, परंतु वह इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी। 


Mirabai मंदिरों में जाकर भगवान का भजन करती थी। Mirabai का कृष्ण भक्ति में नाचना गाना ससुराल वालों को अच्छा नहीं लगता था, इसलिए उन्हें संघर्षों के साथ जूझना पड़ता था।


Mirabai Ka Jivan Parichay हमें सीख देता है कि सदा भगवान का ध्यान करते रहना चाहिए। 


भगवान कृष्ण के प्रति गहरा प्रेम


 Mirabai को मारने की कई बार कोशिश की गई। उन्हें हमेशा ताने सुनने पड़ते थे। Mirabai Ka Jivan Parichay हमें कई मुश्किलों से लड़ना सिखाता है। उनके खाने में कई बार जहर मिलाया गया। 


लेकिन जो कृष्ण का सच्चा भक्त हो तो एक जहर का प्याला क्या कर सकता है। Mirabai जी को कई बार जहर दिया गया। 


Mirabai जी से कहा जाता है कि वह कृष्ण का प्रसाद है तो वह उसे बिना सोचे समझे पी लेती है। वह यह जानती थी कि यह जहर है पर उसके साथ कृष्ण का नाम लग चुका है।

Mirabai Ka Jivan Parichay
Mirabai Ka Jivan Parichay


 जब ससुराल वाले उन्हें बहुत ज्यादा सताने लगे तो वह अपने मायके लौट आई। Mirabai Ka Jivan Parichay जन्म से लेकर मृत्यु तक संघर्ष भरा था।


Mirabai ka वृंदावन में आगमन


कहते हैं कि बाद में मेड़ता का पतन हो गया था। जब मेड़ता का पतन हो गया था। वह वृंदावन आ गई जहां उनकी मुलाकात रूप गोस्वामी से हुई। उसके बाद उन्होंने कुछ वर्ष वृंदावन में रहकर श्री कृष्ण भक्ति की उसके बाद वह द्वारिका नगरी चली गई।


Mirabai की मृत्यु कैसे हुई


कहते हैं कि Mirabai की मृत्यु सन 1560 ईस्वी में हुई थी। हमारे भगवान श्री कृष्ण ने मीरा जी को अपनी मूर्ति में समाहित कर लिया था। इस तरह कह सकते हैं कि उनकी कभी मृत्यु नहीं हुई। वह अपने कर्म पूरे करके भगवान धाम चली गई।


Mirabai जी की रचनाएं


Mirabai जी की चार प्रमुख रचनाएं हैं।

गीत गोविंद टीका

राग गोविंद

राग सोरठ

नारसी का मायरा


भगवान कृष्ण की Mirabai पर कृपा


जब जब Mirabai को विष दिया गया तब तब भगवान कृष्ण ने आकर उनकी मदद की एक बार शेर भेजा गया तो वह नरसिंह भगवान में बदल गया। एक बार टोकरी पर नाग भेजे गए तो वह शालिग्राम बन गए। Mirabai Ka Jivan Parichay  एक अद्भुत तरह का परिचय है।


Mirabai से जुड़े facts


Mirabai Ka जन्म एक राजकुमारी के रूप में हुआ था। वह बचपन से ही राजकुमारी थी।


Mirabai के पिता की मृत्यु अकबर की सेना के साथ युद्ध करते हुए हुई थी।


Mirabai भगवान कृष्ण को अपना पति मानती थी।


Mirabai पूर्व जन्म में वृंदावन की एक गोपी थी जो कि भगवान कृष्ण से प्रेम करती थी। इनका विवाह एक गोप से किया गया परंतु उसके बावजूद वह कृष्ण से प्रेम करती थी।


विवाह के बाद इनका प्रेम कृष्ण के लिए कम नहीं हुआ। जब यह बात उनकी सास को पता चली तो उन्हें कमरे में बंद कर दिया गया, कृष्ण से मिलने की तड़प से उन्होंने प्राण त्याग दिए।


Mirabai के अनमोल वचन


पायो जी म्हें तो राम रतन धन पायो। मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरा न कोई।।


 Mirabai एक राजकुमारी थी। वह चाहती तो आराम का जीवन बिता सकती थी, पर वह मानती हैं कि राम से बड़ा कोई धन नहीं है। राम ही सब कुछ है। वह कहती थी कि मेरे तो गिरधर गोपाल यानी श्री कृष्ण है। दूसरा कोई नहीं है।


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इस आर्टिकल में आपको Mirabai Ka Jivan Parichay| in hindi बताया गया है। अगर आप Mirabai Ke Jivan के बारे में जानना चाहते हैं तो यह आर्टिकल मीराबाई का जीवन परिचय आपकी मदद कर सकता है।

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