यमराज की मजेदार कहानी

यमराज की मजेदार कहानी

एक गांव में एक डाकू और साधु रहते थे। डाकू बहुत चोरियां करता था। वहीं दूसरी और साधु सारा दिन तपस्या करता रहता था। एक दिन दोनों की अचानक मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद दोनों ही यमराज के दरबार में पहुंचे।
 यमराज ने जैसे ही उन्हें देखा, उन्हें कहा, तुम दोनों जो कुछ कहना चाहते हो, तो कह सकते हो। डाकू बहुत बुरे कर्म के साथ आया था। वह बोला महाराज मैंने जीवन भर लोगों को बहुत दुखी किया है। मैंने जीवन भर पाप ही किए हैं। मैं अपराधी हूं। 
मुझे जो दंड आप देंगे, मैं स्वीकार कर लूंगा। फिर डाकू शांत हो गया और अपना सर नीचे झुका लिया। उसके कुछ देर बाद ही साधु बोला। महाराज में जीवन भर तपस्या और भक्ति करता आया हूं। मैं कभी झूठ नहीं बोलता। सदा सच बोलता हूं। मैंने हमेशा अच्छे कर्म किए हैं।

 आप मुझ पर कृपा करें। मुझे स्वर्ग भेज दे।मेरे लिए सारे सुख हो कुछ ऐसा इंतजाम कर दीजिए। यमराज ने दोनों की ही बात बड़े ध्यान से सुनी और फिर डाकू से कहा, तुम्हें आज से इस साधु की दिन-रात सेवा करनी होगी। यही तुम्हारा दंड है।
डाकू कुछ नहीं बोला और दंड भोगने के लिए तैयार हो गए, परंतु उसके थोड़ी देर बाद ही साधु फिर बोल पड़ा महाराज, यह तो डाकू बहुत बड़ा पापी आदमी है यह मेरी सेवा नहीं कर सकता। यह मेरी सेवा करते हुए अगर मुझे छू लेगा तो मैं अपवित्र हो जाऊंगा लेकिन यमराज को यह अच्छा नही लगा वो क्रोधित हो गए और बोले यह डाकू इतना पापी है परंतु तुम्हारी सेवा करने के लिए एकदम तैयार है 
और तुम इतनी भक्ति वाले हो पर इतना भेदभाव करते हो यह अच्छा नही है। आज से तुम डाकू की पूजा करोगे।

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