यहाँ हुआ था राधा कृष्ण का विवाह

यहाँ हुआ था राधा कृष्ण का विवाह

हम सब ने भगवान कृष्ण की कई लीलाओ के बारे में सुना और पढ़ा है। उनकी लीला में एक सीख छुपी होती है। जब कभी भी हम वृंदावन के बारे में सोचते हैं तो राधा कृष्ण के बारे में अवश्य सोचते हैं। भगवान श्री कृष्ण की 16108 रानियां थी। 
उनमें से भगवान श्री कृष्ण की 8 पट रानियां थी। आज भी भगवान श्रीकृष्ण से पहले राधा जी का नाम लिया जाता है। बहुत से लोगों को लगता है कि उन दोनों के बीच बहुत प्रेम था, परंतु उनका विवाह नहीं हो पाया। असल में राधा और कृष्ण का विवाह हुआ था। 
इसका सबूत मथुरा के पास स्थित भांडीरवन में मिलता है। कहा जाता है यहां बन में ब्रह्मा जी प्रकट हुए थे और उन्होंने राधा कृष्ण का विवाह करवाया था। जिस वृक्ष के नीचे ब्रह्मा जी ने दोनों का विवाह करवाया था, उसकी जट्टाएं चारों ओर फैली हुई है। 
यहां भगवान कृष्ण ने बहुत से असुरों का वध किया था। पुराणों के अनुसार नंद बाबा बालक कृष्ण को लेकर भांडीरवन से गुजर रहे थे वहाँ अचानक से बहुत तेज तूफान चलने लगा। नंद बाबा जी श्री कृष्ण को लेकर एक वृक्ष के नीचे खड़े हो गए। तभी वहां राधा जी भी आ जाती है। 
नंदबाबा पहले से ही जानते थे कि राधा और कृष्ण कोई साधारण इंसान नहीं है और कृष्ण को राधा के हाथों में देकर वहां से चले गए। यह सब भगवान श्री कृष्ण की लीला थी। उनकी इच्छा से वहाँ ब्रह्मा जी भी आ पहुंचे और उनका विवाह संपन्न करवाया। भांडीरवन में भगवान श्रीकृष्ण ने बहुत सी लीलाए की है। 
भांडीरवन में भगवान श्री कृष्ण जी ने बांसुरी नहीं पकड़ी है। अक्सर हमने भगवान श्री कृष्ण को हर जगह बांसुरी के साथ देखा है। परंतु भांडीरवन में श्रीकृष्ण ने अपने पैर के अंगूठे के बल पर खड़े होकर राधा जी की मांग भर रहे हैं।
 कहा जाता है कि भगवान ने अपना पहला महारास इसी जगह पर रचाया था। यहां पर जो भगवान की मूर्ति रखी गई है, वह किसी ने बनाई नहीं बल्कि स्वयं प्रकट हुई है। ऐसा भी माना जाता है कि जो भगवान श्री कृष्ण के विवाह में किसी भी रुप में उपस्थित थे, केवल वही भांडीरवन में प्रवेश कर सकते हैं।

No comments: