चुप रहना सबसे बड़ा सुख

चुप रहना सबसे बड़ा सुख

चुप रहने से हम कई बातो को सुलझा सकते है इसीलिए हमेशा कहा जाता है एक चुप सो सुख। 
एक जमींदार था,  वह अपनी घरवाली के साथ रहता था घर मे दो जने ही थे।  जमीदार खेत मे काम करता था और उसकी पत्नी घर का काम करती थी।  पति-पत्नी दोनों ही गर्म स्वभाव के थे। और बात बात पर झगड़ते रहते थे  थोड़ी मामूली बात पर दोनों मे लड़ाई हो जाती थी।  
कभी कभी तो घरवाली का बना बनाया खाना भी जमींदार नही खाता था  एक दिन घरवाली अपनी रिश्तेदारी मे चली गई।  वहां उसे एक बुजुर्ग महिला मिली। 
 बातों बातों मे जमींदार की घरवाली ने बुजुर्ग महिला को बताया कि मेरे घरवाले का मिजाज बहुत चिड़चिड़ा है वे जब तब मेरे से लड़ते ही रहते हैं।  कभी कभी इससे हमारी बनी बनाया खाना ऐसे ही चला जाता है। 
 बुजुर्ग महिला ने कहा यह कोई बड़ी बात नहीं है।  ऐसा तो हर घर मे होता है।  मेरे पास इस की एक अचूक दवा है।  जब भी कभी तेरा घरवाला तेरे साथ लड़े, तब आप उस दवा को अपने मुंह मे रख लेना, इस से तुम्हारा घरवाला अपने आप को शांत करेगा।  बुजुर्ग महिला अपने अंदर चली गई, एक शीशी भर कर ले आई और उसे दे दी।

 जमीदार की घरवाली ने घर आ कर दवा की परीक्षा करनी शुरू कर दी जब भी जमीदार उस से लड़ता था वह दवा मुंह मे रख लेटा था।  इस से काफी असर दिखाई दिया।  जमीदार का लड़ना काफी कम हो गया था। 
 यह देख वह काफी खुश हुआ।  वह ख़ुशी-ख़ुशी बुजुर्ग महिला के पास गई और कहा आप की दवाई तो कुशल सिद्ध हुई है, आपने कहा इस मे क्या क्या डाला है जरा बता देना, मे इसे घर मे ही बना लूँगी।
 एक अनामदार था, एक उसका घर वाला था।  घर मे दो जने ही थे।  जमीदार खेत मे काम करता था और उसकी पत्नी घर का काम करती थी।  पति-पत्नी दोनों ही गर्म स्वभाव के थे।  थोड़ी मामूली बात पर दोनों मे ठन जाती थी।  कभी कभी तो घरवाली का बना बनाया खाना भी बेकार हो जाता था।  एक दिन घरवाली अपनी रिश्तेदारी मे चली गई।  वहां उसे एक बुजुर्ग महिला मिली।  बातों बातों मे जमींदार की घरवाली ने बुजुर्ग महिला को बताया कि मेरे घरवाले का मिजाज बहुत चिड़चिड़ा है वे जब तब मेरे से लड़ते ही रहते हैं।  कभी कभी इससे हमारी बनी बनाई लूट रहित चली जाती है।  बुजुर्ग महिला ने कहा यह कोई बड़ी बात नहीं है।  ऐसा तब हर घर मे होता है।  मेरे पास इस की एक अचूक दवा है।  जब भी कभी तेरा घरवाला तेरे साथ लड़े, तब आप उस दवा को अपने मुंह मे रख लेना, इस से तुम्हारा घरवाला अपने आप को शांत करेगा।  बुजुर्ग महिला अपने अंदर चली गई, एक शीशी भर कर ले आई और उसे दे दी।

 जमीदार की घरवाली ने घर आ कर दवा की परीक्षा करनी शुरू कर दी जब भी जमीदार उस से लड़ता था वह दवा मुंह मे रख लेटा था।  इस से काफी असर दिखाई दिया।  जमीदार का लड़ना काफी कम हो गया था।  यह देख वह काफी खुश हुआ।  वह ख़ुशी-ख़ुशी बुजुर्ग महिला के पास गई और कहा आप की दवाई तो कुशल सिद्ध हुई है, आपने कहा इस मे क्या क्या डाला है जरा बता देना, मे इसे घर मे ही बना लूँगी।  बार बार आना जाना मुश्किल हो जाता है।  इस बुजुर्ग बुजुर्ग महिला ने जवाब दिया की जो शीशी मैंने तुमसे कहा था कि मे शुद्ध जल के सिवाय कुछ भी नहीं था।  आपकी समस्या का हल तो आपके चुप रहने से हुआ है।  जब आप दवा यानि की पानी को मुंह मे भर लेती थी तो आप बोल नहीं सकते थे और आपकी चुप्पी को देख कर आपके घरवाले का भी गुस्सा शांत हो जाता था।  इसी को "एक चुप सौ सुख" कहते हैं।  बुजुर्ग महिला ने जमीदार की घरवाली को सीख दी की इस दवा को कभी मत भूलो और अगर किसी को जरूरत पड़ गई तो आगे भी ठहर जाओ।  जमीदार की घरवाली ने बुजुर्ग महिला की बात को गांठ बांध लिया और ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर वापिस आ गई।

 बार बार आना जाना मुश्किल हो जाता है।  इस बुजुर्ग बुजुर्ग महिला ने जवाब दिया की जो शीशी मैंने तुमसे कहा था कि मे शुद्ध जल के सिवाय कुछ भी नहीं था।  आपकी समस्या का हल तो आपके चुप रहने से हुआ है।
  जब आप दवा यानि की पानी को मुंह मे भर लेती थी तो आप बोल नहीं सकते थे और आपकी चुप्पी को देख कर आपके घरवाले का भी गुस्सा शांत हो जाता था।  इसी को "एक चुप सौ सुख" कहते हैं। 
 बुजुर्ग महिला ने जमीदार की घरवाली को सीख दी की इस दवा को कभी मत भूलो और अगर किसी को जरूरत पड़ गई तो आगे भी ठहर जाओ।  जमीदार की घरवाली ने बुजुर्ग महिला की बात को गांठ बांध लिया और ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर वापिस आ गयी

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