मां वैष्णों देवी की कहानी

मां वैष्णों देवी की कहानी

जम्मू कश्मीर में स्थित मां वैष्णो का नाम किसने नहीं सुना? कटरा के निकट हंसाली ग्राम में मां के परम भक्त श्रीधर रहते थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। एक दिन वह नवरात्रि पूजन के लिए कुछ कन्याओं को बुलाने गए। मां वैष्णो देवी कन्या रूप में आ गई। 
भोजन के बाद सभी कन्या चली गई, किंतु मां वैष्णो नहीं गई। वह श्रीधर से बोली पूरे गांव को भंडारे का निमंत्रण दीजिए। श्रीधर ने ऐसा ही किया। लौटते वक्त गोरखनाथ और भैरव नाथ जी को उनके चेलों सहित न्योता दिया गया ।श्रीधर की कुटिया में भीड़ लग गई। मां वैष्णो कन्या रूप में ही भोजन परोसने लगी। जब कन्या भैरवनाथ के पास खाना परोसने आई तो वह बोले, मुझे तो भांग और मदिरा पसंद है। कन्या ने कहा, यह सब यहां नहीं मिलता। यह ब्राह्मण का घर है। भैरवनाथ भड़क गया, परंतु माँ उस की चाल पहले से ही जानती थी। माता त्रिकूट पर्वत की और उड़ गई। मां के साथ महाबली हनुमान जी भी थे।