जब हनुमान से डरकर भागे थे शनिदेव

जब हनुमान से डरकर भागे थे शनिदेव

शनि देव जी के नाम से कोई भी भयभीत हो जाता है, लेकिन महाबली हनुमान के भक्तों पर शनि का कोई असर नहीं होता। एक बार शनिदेव ने सोचा कि क्यों ना हनुमान को भी भयभीत किया जाए, लेकिन यह शनिदेव को ही भारी पड़ा।
 कहा जाता है कि शनिदेव अपनी नजर हमेशा नीचे रखते हैं। वह जिस पर अपनी दृष्टि डालते हैं, वह नष्ट हो जाता है। शनि देव नहीं जानते थे कि महाबली हनुमान कितने शक्तिशाली हैं। उन्होंने एक बार पूरा सूरज निगल लिया था।
 शनिदेव ने हनुमान से कहा था कि त्रेता युग जा चुका है जब भगवान वासुदेव ने अपनी लीला समाप्त की तब से कलयुग चल रहा है।
 इसमें मेरा प्रभाव बहुत ज्यादा है। आप कितने ही ताकतवर हो, पर मेरा प्रभाव बहुत ज्यादा है। अब मैं आपके लिए शरीर में प्रवेश कर लूंगा।
शनि देव जी को यह याद नहीं था कि रघुनाथ के चरणों पर आश्रित करने वालों को काल का प्रभाव नहीं होता। हनुमान ने शनिदेव को बहुत समझाया परंतु वे नहीं माने और हनुमान के मस्तक पर बैठ गए।
 हनुमान के मस्तक में खुजली होने लगी। इसे मिटाने के लिए उन्होंने एक बड़ी चट्टान अपने मस्तक में रखी और राम नाम जपने लगे। शनिदेव जोर-जोर से चिल्लाने लगे। तभी हनुमान कहते हैं कि मस्तक की खुजली मिटाने का यही रास्ता था। ऐसा कहते ही हनुमान ने दूसरी चट्टान सर पर रख दी शनिदेव कहने लगे। 
मैं संधि करने को तैयार हूं। कृपया मुझे छोड़ दें। यह कहते ही हनुमान ने तीसरी चट्टान सिर पर रखी शनिदेव कहने लगे मैं कभी आपके सामने नहीं आऊंगा। हनुमान नहीं माने और चौथी चट्टान मस्तक पर रखी शनिदेव कहने लगे त्राहिमाम त्राहिमाम रामदूत हे। पवन कुमार मैं उसको कभी नहीं देखूंगा जो आपकी पूजा करेगा।
 मुझे छोड़ दो तभी हनुमान कहते हैं , अभी पांचवा पर्वत बचा है। तभी शनिदेव हनुमान के पैरों पर गिर पड़ते हैं। मैं सदैव आपके वचनों का पालन करूंगा। तभी शनिदेव अपनी पीड़ा लिए तेल मांगने लगे। हनुमान जी ने कहा मैं तुम्हें तेल नही दूंगा जो भक्त तुम पर तेल चड़ाएगा उसी से तुम्हारी पीड़ा दूर होगी तभी से शनिदेव को तेल चढ़ाया जाता है l

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