राधा- कृष्ण का विवाह क्यों नही हुआ?

राधा- कृष्ण का विवाह क्यों नही हुआ?

राधा-कृष्ण से जुड़ी कथाओं में भी यही सुनने को मिला है कि राधा और कृष्ण ने एक दूसरे से कभी विवाह नहीं किया था। मगर, सभी यह भी जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसी क्या वजह थी जो राधा और कृष्ण का विवाह नहीं हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के परम भक्त श्रीधामा जब उनके दर्शन के लिए गोलोक पहुंचते हैं तो वह अपने आराध्य को पुकारते हैं। बहुत पुकारने पर भी उन्हें श्री कृष्ण के दर्शन नहीं होते हैं। तब वह नारद जी के पास जा कर इसका कारण पूछते हैं। नारद उन्हें बताते हैं कि आप अधूरा नाम ले रहे हैं। गोलोक में श्री कृष्ण से पहले आपको श्री कृष्णप्रेमिका राधा रानी का नाम लेना होगा। श्रीधामा को नारद मुनी की बात समझ नहीं आती है। वह किसी तरह से अपने आराध्य के दर्शन करते हैं। उन्हें भोग में माखन चढ़ाते हैं। मगर, जब श्रीधामा देखते हैं कि राधा उन्हें अपना झूठा माखन खिला रही हैं तो उन्हें क्रोध आ जाता है। वह श्री कृष्ण से पूछते है कि ‘प्रेम और भक्ति में क्या श्रेष्ठ है’ तब श्रीकृष्ण अपने भक्त को द्वारपाल बना कर विश्राम करने चले जाते हैं और वहीं सोचते हैं, कि ‘प्रेम और भक्ति में क्या श्रेष्ठ है’। श्री कृष्ण को जब कुछ समझ नहीं आता तो वह राधा को याद करते हैं और राधा भी उनके पास दौड़ी चली जाती हैं। मगर, श्रीधामा उन्हें अंदर नहीं जाने देते। दोनों में तर्कवितर्क होता है। जैसे ही राधा श्री कृष्ण के कक्ष में प्रवेश करने वाली होती हैं श्रीधामा उन्हें 100 वर्ष तक श्री कृष्ण को भूल जाने और मृत्युलोक में रहने का श्राप दे देते हैं। श्रीधामा के श्राप के बाद राधा को पृथ्वीलोक जाना होता है। श्री कृष्ण भी अपनी राधा से मिलने के लिए पृथ्वी पर जन्म लेते हैं। मगर, राधा को गोलोक का कुछ भी याद नहीं होता।
 भले राधा को गोलोक के बारे में कुछ भी याद नहीं होता मगर श्री कृष्ण उन्हें कभी सपने तो कभी अपनी आंखों में गोलोक के दर्शन कराते रहते हैं। राधा को भी श्री कृष्ण से प्रेम हो जाता है। मगर, राधा के बाल सखा एवं महापंडित उग्रपत के पुत्र आयान को भी राधा से प्रेम होता है। वह राधा को हासिल करने के लिए श्री कृष्ण को मारने का प्रयास करता रहता है। राजा कंस के साथ मिल कर वह श्री कृष्ण को राधा से दूर करने के लिए एक के बाद एक असुर बुलाता है। मगर, राधा-कृष्ण को अलग नहीं कर पाता है। तब ही एक घटना के दौरान राधा के पिता को अपने परम मित्र उग्रपत को वचन दिया होता है कि वह जीवन में एक बार उग्रपत की किसी एक मांग को जरूर पूरा करेंगे। मौका आने पर उग्रपत अपने बेटे आयान का विवाह राधा से करने की बात रखते हैं। मगर, राधा के पिता राधा का विवाह श्री कृष्ण से ही कराना चाहते हैं और अपना वचन पूरा नहीं कर पाने के लिए वह सन्यास लेने की घोषणा करते हैं। तब ही, श्री कृष्ण को गोलोक में श्री धामा द्वारा राधा को दिया श्राप याद आता है। श्री कृष्ण इस बात का जिक्र राधा से करते हैं और विवाह को न करने की बात रखते हैं। इसके साथ ही वह राधा को पुत्री धर्म निभाने के लिए भी कहते हैं।
 राधा अपने पिता का मान रखने के लिए श्री कृष्ण की जगह अपने बाल सखा आयान से विवाह कर लेती हैं और श्री कृष्ण भी अपना कर्म करने के लिए वृंदावन से मथुरा चले जाते हैं। इस तरह राधा और कृष्ण कभी भी एक दूसरे से विवाह नहीं कर पाते हैं।

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