जानिए कुंभकरण के 6 महीने तक सोते रहने का कारण

जानिए कुंभकरण के 6 महीने तक सोते रहने का कारण

कुंभकरण का नामकरण
 जैसा आप सभी जानते हैं कि कुंभकरण रामायण के एक प्रमुख पात्र का नाम है। वह ऋषि विश्वा और राक्षसी कैकसी का पुत्र था और लंका के राजा रावण का छोटा भाई भी था। कुंभ का अर्थ होता है घड़ा । और कर्ण का अर्थ होता है कान बचपन से बड़े कान होने के कारण ही इसका नाम कुंभकर्ण रखा गया। वह बचपन से ही बहुत बलशाली था। उसके जितना खाना पूरे राज्य में कोई भी नहीं खा सकता था। बुधिमान भी था कुंभकरण
कुंभकरण रावण से ज्यादा समझदार भी था। जब रावण ने कुंभकरण से मदद मांगी थी तो कुंभकरण ने रावण को खूब समझाया था कि वह यह गलत काम ना करें।
कुंभकरण का वरदान
 कुंभकर्ण ने ब्रह्मा जी की तपस्या की थी। जब ब्रह्मा जी उसके सामने प्रकट हुए तो उन्होंने कुंभकरण से पूछा कि उसे क्या वरदान चाहिए? कुंभकरण भगवान ब्रह्मा से प्रसन होकर उनसे इंद्र का राज सिंहासन मांगना चाहता था। इसके बाद देवताओं पर कुंभकरण का अधिकार हो जाता जिससे इंद्र बहुत डर गए। किंतु वे भगवान ब्रह्मा को वरदान देने से मना नही कर सकते थे। इसलिये वे माता सरस्वती के पास सहायता मांगने के लिए पहुँचे। जब  इंद्र माता सरस्वती के पास पहुँचे तो उन्हें सारी बात बताई तो माता सरस्वती ने एक योजना बनाई।
वरदान विफल् हुआ।
 उन्होंने इंद्र को कहा कि जब कुंभकरण भगवान ब्रह्मा जी से वरदान मांग रहा होगा तब माता सरस्वती उसकी जिव्हा पर बैठ जाएगी जिस कारण वह इन्द्रासन की जगह निद्रासन मांग लेगा।जब भगवान ब्रह्मा ने कुंभकरण की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान मांगने को कहा तभी देवी सरस्वती कुंभकरण की जिव्हा पर  बैठ गयी जिसके कारण कुंभकरण के मुहं से इंद्रासन की जगह निद्रासन निकल गया। भगवान ब्रह्मा ने उसे यह वरदान दे दिया जिसके फलस्वरूप अब वह जीवन भर केवल सोता ही रहेगा। 
रावण का चिंतन
यह देखकर कुंभकरण व उसके दोनों भाईयो को चिंता होने लगी और वो बहुत डर गए।जब रावण ने अपने भाई की ऐसी स्थिति देखी तो उसने भगवान ब्रह्मा से कहा  कि जिस मनुष्य को आपने बनाया है उसे आप इस तरह जीवन भर के लिए नींद में सुलाकर उसका जीवन मृत्यु से पहले ही समाप्त कर देंगे। रावण का अपने भाई के प्रति प्रेम व कुंभकरण का दुःख देखकर भगवान ब्रह्मा को उन पर दया आ गयी। 
उन्होंने कहा कि क्योंकि ब्रह्म वाक्य झुठलाया नही जा सकता है फिर भी वे कुंभकरण को 6 माह में एक दिन निद्रा से जागने की अनुमति देते है ।कुंभकरण 6 महीने तक गहरी नींद में सोएगा व केवल एक दिन के लिए जागेगा तथा उसके पश्चात फिर 6 महीने के लिए सो जायेगा। 
इस घटना के बाद कुंभकरण 6 महीने तक लगातार सोता था व केवल एक दिन के लिए जागता था व उसी दिन सारे कार्य, भोजन इत्यादि करता था। इसी कारण कुंभकरण छह महीने तक सोता रहता था।

No comments: