जानिए क्यों किये थे कृष्ण ने 16,108 विवाह?

जानिए क्यों किये थे कृष्ण ने 16,108 विवाह?

ये तो सब जानते हैं कि श्री कृष्ण राधा से सबसे अधिक प्रेम करते थे पर इनका कभी विवाह नहीं हो पाया।  लेकिन राधा-कृष्ण का प्यार अमर था जिसके कारण आज भी कृष्ण भगवान से पहले राधा का नाम लिया जाता है।  ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण की सिर्फ 8 पत्नियां थीं जिनका नाम रुक्मणी, जाम्बवन्ती, सत्यभामा, कालिन्दी, मित्रबिन्दा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मण था।  लेकिन आज हम जानेंगे कि उन्होंने 16100 विवाह क्यों किए।
  कृष्ण अपनी आठों पत्नियों के साथ खुशी से द्वारिका में रह रहे थे।  एक दिन स्वर्गलोक के राजा देवराज इंद्र ने आकर उनसे प्रार्थना की हे कृष्ण प्राग्ज्योतिषपुर के दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार से देवतागण त्राहि-त्राहि कर रहे हैं।  क्रूर भौमासुर ने वरुण का छत्र, अदिति ने कुंडल और देवताओं ने मणि चीन छीन ली है।  त्रिलोक विजय हो गया है।  इंद्र ने कहा भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आम परिवारों की अति सुंदर कन्याओं का हरण कर उन्हें अपने यहाँ बंदीगृह में डाल रखा है।  जिसने अमर होने के लिए 16 हजार कन्याओं की बलि देने का निश्चय कर लिया है। तभी श्री कृष्ण गरुड़ पर सवार हो कर वहाँ पहुंचे और उसे मार दिया इसी तरह वो सभी कन्याएं उस राक्षस के चंगुल से मुक्त हो गयी श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि अब तुम सभी अपने घरों को वापिस लौट सकती हो परंतु वो सभी कहने लगी अब हम कहा जाएंगे कौन हमे स्वीकार करेगा सभी हमे कलंकित समझेंगे कौन हमसे विवाह करेगा तभी कृष्ण ने उनसे कहा कि व उनके साथ द्वारिका चले और वही रहे सभी कन्याएं उनके साथ चली गयी और वही रहने लगी उनका मानना था कि आत्मा एक प्रेमिका है और प्रमात्मा उसका पति तभी से उन सभी ने कृष्ण अपने प्रमात्मा को अपना पति मान लिया था और अपनी आत्मा को पूरी तरह से कृष्ण को समर्पित कर दिया था और ऐसा भी कहा जाता है जब त्रेता युग में विष्णु राम अवतार में आए थे तो हज़ारो कन्याएं उनसे विवाह करना चाहती थी परंतु तब राम ने उनसे कहा था कि इस जन्म में तो मैं एक पत्नी के साथ रहने का संकल्प ले चुका हूँ अगले जन्म में तुम सबकी ये इच्छा जरूर पूरी होगी। इस तरह श्री कृष्ण ने अपने वचन को पूरा किया। 

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